
एक तिलकवर नामक गाँव था । उस गावमे ज्यादातर लोग जो थे वह मजदूर थे और दूसरे गावमे काम करने के लिए जातेथे ।वह गाव बहुत सुंदर था । उस गावमें स्वच्छता के प्रति सभी लोगोंमें अच्छी भावना रही है । उन्ही गावमे कुछ किसान भी ठगे जिनके पास भीत कम जमीन थी जिसमे वह उनकी फसल को उगाते थे और जुसमे से अपना पेट भरते थे । उन्हीं में 2 लोग थे निर्णय और लक्ष्य नाम के दो किसान थे जिन्होंने उनकी सारी की सारी जान खेतिमे लगा दी थी पर निर्णय को ज्यादा मेहनत पसंद नही थी । ऐसे बहोत साल उन डोनेने मिलकर काम किया पर ज्यादा पैसे वह उससे कमा नही पा रहे थे अब उनको भी 1 - 1 बेटा था और उनके बेटे उनके यह खेतिसे तंग आके वह गाव छोड़कर भाग गए अब उसके कारण उन दोनों को कोई सहारा न होने कारण अब सिर्फ वह दोनों को ही उनका पेट भरना था । उन दोनों के भी बेटोने उनको धोका देके वह जमीन अपने नाम करकर वह बेच दी और उसी कारण अब वह बहुत नाराज हो चुके थे । उनको पेट भरना था उसके लिए काम तो जरूरी था उसिलये अब काम करने का सोचा पर क्योंकि वह बचपनसे कीसान होने के कारण उनको मजदूरी के बारे में ज्यादा पता नही था । अब उनकी उम्र भी करीब 70 साल हो चुकी थी सगरीर में काम करने की ज्यादा ताकत बची नही थी पर उनको पेट भरना था पर निर्णय को यह काम करना पसंद नही था वह धन का बहुत लालची था उसीकार्न केक दिन उसने बैंक में चोरी करने की सोची और क्योंकि उसको चोरी करना नही आता था निर्णय चोरी करते सनी ही पकड़ा गया और उसे 12 सालोकि सजा सुनाई गई और 10 लाख का जुर्माना भी । सजा दोस्त लक्ष्य को यकीन नही हो रहा तगा की उसका दोस्त निर्णय इतना गिर सकता है । वह बहुत दुखी ही चुका था उसको हर बार उसकी याद आती थी । वह दोनों बहुत बूढे हो चके थे । निर्णय तो जेल में ही 6 साल बाद उसने सजे प्राण त्याग दिए अब उसीके कारण उसके दोस्त लक्ष्य को भी यह बात सुनकर हार्ट अटैक आया उसका इलाज सरकारी अस्पताल में किया गया पर उसने मानो जीने की ही आशा छोड़ दी थी और उसने भी उसके प्राण त्याग दिये ।
अब वह दोने भी स्वर्ग में पहुचे जहाँपर भगवान हो ते है । एक दिन भगवान ने उन दोनों को भी एज साथ बकाया वह दोनों भी एज दूसरे को साथ देखकर बहुत खुश हुए । पर , उसके बाद भगवान ने उन दोनों को भी उनकी परेशानियां बताने के लिए कहा तो फिर पहले निर्णय ने उनको उसकी परेशानियां बताई। जिसमे उसने भगवान कोभी डाट दिया और कहा ," मुझे वह घुटन हो रही थी पर मुझे ज्यादा धन , पैसा ,दौलत , जमीन सबकुछ चाहिए था मुझे काम करना पसंद नही आता था । "
फिर भगवान ने उसे तुम कौनसे घर मे जाना ओसन्द करोगे ?
उसने कहा ," मुझे कोई घर नही चाहिए मुझे कुछ ऐसा करो कि पैसा मुझे मिलता ही रहे" भगवान बोला उसे ,"तथास्तु"
फिर लक्ष्य को बकाया उसको अपनी परेशानियां बोलने के लिए आमंत्रित किया । उसने कहा , " मुझे कुछ नही चाहिए मेरे सबकुछ था अच्छा गाव , गाँववाले , काम तो मुझे कुछ क्यों चाहिए ? । है बस एक ही परेशानी है कि मेरे घरपर कोई गरीब आते थे तो में सभीको मदत नही कर सका । मुझे सिर्फ यही चाहिए कि में लोगो कु मद्त कर सकू ।" भगवान उसी भी " तथास्तु " कहा और उन दोनों को भी ओर्थ्वी पर दहेज दीया । पर क्योंकि निर्णय ने ऐसा मांगा तगा की मुझे पैसा मिलता ही रहे कुछ काम करने की जरूरत न पड़े दो वह गाव का सबसे बड़ा भिकारी बना।
और क्योंकि लक्ष्य ने ऐसा मांगता की में दूसरो की मदत कर सकू । तो वह उस गावका सबसे बड़ा अमीर व्यक्ति बना।
यहां पर हमें यह सिख मिलती है कि - हने जितना भी मिले उससे हमें खेश रहना चाहिए , हमे ज्यादा लालच नही करनी चाहिए ।
एक टिप्पणी भेजें