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दुनियामे करोड़ो लोग है। सबके अलग चेहरे है । कोई काला है , कोई गोरा है , कोई मनसे अच्छा है , कोई मनसे प्यार है ,कोई मनसे कठोर और कोई कभी दूसरे की संवेदना नही समझता , कोई सदैव गरीब लोगोके के दुख करता है। पर यह दुनिया सबसे अलग है , आपको कभी ऐसा लगता होगा कि भगवान ने मुझे यह क्यों दिया सिर्फ इतना ही क्यों दिया मुझे अमीर क्यों नही बनाया ।
आज जिन लोगोको ऐसा लगता है इनकेलिये एक कहानी जो बदल देंगी आपकी सारी जिंदगी एक नाम जो कभी लोगो की चप्पल , बूट , सैंडल आदि. यह उन लोगोके साफ करता तगा । कभी लोगो की गाड़ी साफ करता था और लोगोसे *एक* रुपये लेकर अपने पितासे यह बातें छिपाकर यह काम करता था।
जी हां दोस्तो , उस लडके का नाम है तुषार सलगावकर ।
उसके पिताजी किसान थे , पर उनके पास सिर्फ आधा एकड़ जमीन थी वह भी बंजर थी जुसमे ज्यादा उत्पादन नही होता था । इसी कारण उनको सालाना सिर्फ खेतिसे 12000 से 13000 रुपये मिलते थे पर उनके घरमे 6 सदस्य थे । पर यह इतनी कमाई से उनको सिर्फ 2 वक्त का खाना मिल जाता था । उसके पिता हिलालकुमार सलगावकर । उनको 2 बेटे थे पर उसमेंसे एक बचपनसे अलग बर्ताव करता था , और वह मानो एक छोटा बच्चा है। उसके पिता को तुषारपर हमेशा भरोसा था कि वह एक दिन इस गरीबीसी किनारे लगाएगा । उनको तुशारको बहोत सिखाना था पर घरखर्च के के कारण उन्होंने हात टेक दिए थे । पर तुषार को पढ़कर कुछ बनना था इसिलए वह यह उससे पिता से छिपाकर काम करता था और इस कामसे वह हररोज के 50 रुपये कमा लेता था । जिससे वह पढ़ाई करता था ।
तुषार बड़ा होता गया और उसकी पहली अग्निपरीक्षा मतलब 10 वी की परीक्षा आई उसने दिन रात एक कर दिए थे वह सिर्फ 3 घण्टे सोता था और देर रात तक एक दिए के नीचे छिपकर पढाई करता था। उसने यह सभी विषय अच्छेसे से छुड़ाए ।
अब ....... परीक्षा का रिजल्ट आ चुका था और उसके पिताजी बहूत ही भावुक थे । और रिजल्ट आने से पहले तुषारको बहोतसी फोन आए । वह लोग तुषारको बताना चाहते थे कि ,"तुमने इतिहास रच दिया है तुम महाराष्ट्र के सभी बच्चों को पीछे छोड़के तुम अव्वल आए हो''। पर तुषार को लगा यह सब उसका मजाक उड़ा रहे है। वह नाराज हो गया और बहार चला गया पर तुशार भर आया तो इतनी भीड़ उसके घर पर खड़ी थी कि मानो वह चौक उठा। किसी के हातमे पेढे ,हार , पुष्पगुच्छ और खुशी सबकुछ था। जब उसके पिताजी आए तो वह आकर उसके जल्द गले लग गए और कहने लगे ,"बेटा तुमने मेरा सपना कर दिया तुमने 99.97% प्रतिशत लाके अव्वल आए हो" । उसको खुशी हुई सभी बहुत खुश थे।
पर कहानी खत्म नही होती , अगली बार वह 12 वी में भी 7 वे नम्बर पे आकर 99.93 % अंक प्राप्त करता है और उसके बाद उसको बहोत लोग अगली शिक्षा के लिए आर्थिक मद्त करते है ।
उसके बाद वह UPSC जो बहुत कठिन परीक्षा मानी जाती है उसके लिए वह तयारी करता है वह करीब 2 साल उसकी मेहनत करता है और उसके बाद जब परीक्षा का दिन आता है तो उसको वह देता है ।
अब सभी उसके परिवार , रिश्तेदार , अडोस- पड़ोस के लोगोको उसकी चिंता होती है और भावुक होते है। जब निर्णय आता है वह मतलब चौकाने आला वह पूरे देशमेसे पहला क्रमांक प्राप्त करता है । सभी लोग रोने लगते है क्योंकि उनकी आंखों में वह खुशी के आंसू होते है । और आखरीमे वह मुलाखत भी अच्छेसे दे देता है और उसे 'आईएएस ' की पदवी मिलती है तब तो मानो की इतिहास में भी एक नया इतिहास बन गया हो ।
आज तुशार हमारे एक प्रेरणा है ।जिसने उसकी पढ़ाई के लिए यह इतना किया कि मानो वह हमारे भाषा मे कहते उसे - निचले दर्जे के काम करके सिर्फ और सिर्फ पढाई के लिए । आज जो भे यह सोचता है कि मुझे यह क्यों नही है और वह उसे आधा- अधूरा समझता है उसके लिए जीता - जागता उदाहरण , तुषार सलगावकर ।
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